*🌼🌼🌼वाणी:- कबीर, सतगुरु के उपदेश का, सुनिया एक बिचार।* 🌼🌼🌼
जो सतगुरु मिलता नहीं, जाता यमके द्वार।।5
वाणी:- कबीर, यम द्वारेमें दूत सब, करते खैंचा तानि।
उनते कभू न छूटता, फिरता चारों खानि।।6
वाणी:- कबीर, चारि खानिमें भरमता, कबहुं न लगता पार।
सो फेरा सब मिटि गया, सतगुरुके उपकार।।7
सरलार्थ:- वाणी सँख्या 5 से 7 का भावार्थ है कि ‘‘तत्वज्ञान’’ की प्राप्ति के
पश्चात् विचार लगाया कि यदि सतगुरु नहीं मिलते तो भक्तिहीन जीव यमद्वार
अर्थात् काल के नरक का द्वार जिसके अन्दर यमराज विराजमान है, उसके
करोड़ों यमदूत हैं जो मृत्यु उपरांत भक्तिहीन प्राणी को यमराज के पास ले जाते
हैं। जो उनको धर्मराय के आदेशानुसार जैसी-जैसी यातनाएं लिखी हैं, वैसी
यातनाएं देता है, नरक में डालता है। साथ में ही नरक बना है, उसी के पास
यमराज का आसन है। जिस समय यमदूत पापी प्राणियों को कर्मानुसार नरक में
डालते हैं तो जीव उस नरक के कष्ट को देखकर वापिस भागने की कोशिश
करते हैं। यमदूत उनको डण्डों, भालों तथा गंडासों से मार-पीटकर नरक में डाल
देते हैं। इसको खैंचातान कहा है। नरक में तो जाता ही, फिर 84 लाख प्रकार
के प्राणियों के शरीरों में भी कष्ट उठाता, कभी-भी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता
था। वह सब फेरा (चक्र) मेरे सतगुरु देव जी के उपकार से समाप्त हो गया। अब
सत्य साधना शास्त्रानुसार करके सीधे सत्यलोक में चले जायेंगे। न नरक में जाना
तथा न 84 लाख प्राणियों के जीवनों का कष्ट उठाना। भवसागर से पार हो जाना
है।
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