अपने शरीर के समान अन्य कोई वस्तु प्रिय नहीं है,

 *🌼🌼अपने शरीर के समान अन्य कोई वस्तु प्रिय नहीं है, वह  शरीर भी*  🌼🌼



आपके साथ नहीं जाएगा। फिर अन्य कौन-सी वस्तु को तू अपना मानकर फूले और भगवान भूले फिर रहे हो। सर्व संपत्ति तथा परिजन एक स्वपन जैसा साथ है।


कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि मेरी अपनी राय यह है कि पूर्ण संत से सत्य नाम (सत्य साधना का मंत्र) लेकर अपने जीव का कल्याण कराओ और जब तक आप स्वपन (संसार) में हैं, तब तक स्वपन देखते हुए पूर्ण संत की शरण में जाकर सच्चा नाम प्राप्त करके अपना मोक्ष कराओ।


 सर्व प्राणी जीवन रूपी रेलगाड़ी (Train) में सफर कर रहे हैं। जिस डिब्बे (Compartment) में बैठे हो, वह आपका नगर है। जिस सीट पर बैठे हो, वह आपका परिवार है। जिस-जिसकी यात्रा पूरी हो जाएगी, वे अपने-अपने स्टेशन पर उतरते जाएंगे। यही दशा इस संसार की है। जैसे यात्रियों को मालूम होता है कि हम कुछ देर के साथी हैं सम्य व्यक्ति उस सफर में प्यार से रहते हैं एक-दूसरे का सहयोग करते हैं इसी प्रकार हमने अपने स्वपन वाले समय को व्यतीत करना है। स्वपन टूटेगा या शरीर छूटेगा तो पता चलेगा यह क्या था? वह परिवार तथा संपत्ति कहाँ है जिसको संग्रह करने में अनमोल जीवन नष्ट कर दिया। 


संसार के अंदर परमात्मा के अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो मृत्यु के समय में यम के दूत कण्ठ को बंद करेंगे, उस समय आपकी सहायता करे। परमेश्वर उसी की मदद करता है जिसने पूर्ण संत से दीक्षा ले रखी होगी।

 परमेश्वर उस सतगुरू के रूप में उपदेशी की सहायता करता है। इसलिए सतगुरू जी की शरण में आने के पश्चात् ज्ञानवान साधक परमेश्वर में ऐसी लग्न लगाए जैसी 1. मंग 2. पतंग 3. सती 4. शूरवीर लगाते हैं अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटते।

शूरवीर टुकड़े-टुकड़े होकर पंथ्वी पर गिर जाना बेहतर मानते हैं पीछे कदम नहीं हटाते। पुराणों में तथा श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 2 श्लोक 38 में कहा है कि अर्जुन! यदि सैनिक युद्ध में मारा जाता है तो स्वर्ग में सुख प्राप्त करता है। भक्त भक्ति मार्ग में संघर्ष करते हुए भक्ति करके शरीर त्याग जाता है तो सतलोक सुख सागर में सदा के लिए सुखी हो जाता है। जन्म-मरण का संकट सदा के लिए समाप्त हो जाता है।

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