गुरु की महत्ता प्रस्तुत वाणी मे वर्णन

 कबीर 

ग्यान प्रकास्या गुर मिल्या, सो जिनि बीसरि जाइ।

जब गोबिंद कृपा करी, तब गुर मिलिया आइ॥


⤵️

कबीर परमेश्वर गुरु की महत्ता प्रस्तुत वाणी मे वर्णन करते हुए कहते है कि, गुरु से भेंट होने पर ज्ञान रूपी प्रकाश उत्पन्न हुआ है । ऐसे ज्ञान स्वरुप गुरु से विमुख नहीं होना चाहिए, गुरु को विस्मृत नहीं करना चाहिए ।


 यह परमेश्वर की ही कृपा है की गुरु से भेंट हो पाई है । यह परमेश्वर की कृपा ही है की सतगुरु की प्राप्ति संभव हो पाई है । इस महिमा युक्त गुरु को कभी भी विस्मृत नहीं करना चाहिए । इस साखी में गुरु की महत्ता को बताया गया है और साथ ही परमेश्वर की कृपा से ही गुरुदेव की प्राप्ति होती है ।

 

उल्लेखनीय है की गुरु की कृपा के बगैर साधक में भटकाव होता है । ज्ञान के अभाव में वह लोकोचार और देखा देखी अनुसरण करता है । यह भक्ति मार्ग का ही भटकाव है । साहेब की इनके विरुद्ध मान्यता है की परमेश्वर की प्राप्ति के लिए किसी बाह्य कार्य की आवश्यकता नहीं है ।


 शास्त्रों का अनुसरण करना, लोगों का अनुसरण करना यथा कर्मकांड, तीर्थ आदि भक्ति के लिए कोई मायने नहीं रखते हैं । यह भटकाव भी माया के कारण ही होता है । माया के इस भ्रम को गुरु अपने ज्ञान से दूर करता है । साधक को वास्तविक सत्य दिखाता है । सत्य का ज्ञान ही तत्वज्ञान है।

🙏🏻

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad